दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में खुफिया एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला है। इस ब्लास्ट का तुर्की कनेक्शन सामने आया है और मामले के मुख्य आरोपी आतंकी डॉक्टर उमर, आदिल और मुजम्मिल की तुर्की यात्रा की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स से तुर्की में मिले थे, जिन्होंने इनके भारत में आतंकी गतिविधियों का संचालन किया और पूरे देश में बड़े हमलों की योजना बनाई थी.

कैसे खुला तुर्की का नेटवर्क

जांच एजेंसियों ने पाया कि विदेश यात्रा के दौरान आतंकी डॉक्टर टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े और हैंडलर के निर्देश पर वे देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए। उनका मकसद दिल्ली जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना और भारत भर में टारगेट तय करना था। जांच में पता चला है कि श्रीनगर और अनंतनाग की दो महिला डॉक्टरों को कश्मीर के मौलवी इरफान ने अपने अस्पताल के कार्यकाल के दौरान कट्टरपंथी बनाया था। मौलवी ने युवाओं को गजवा-ए-हिंद और हिंदू-विरोधी विचारधाराओं से भी प्रभावित किया.

ब्रेजा कार और डिजिटल सबूत

इस केस में दो महिला डॉक्टरों के पास से 400 से ज्यादा एन्क्रिप्टेड चैट्स, विदेशी फंड एवं लॉजिस्टिक्स की योजनाएं बरामद हुई हैं। खुफिया एजेंसियां अभी भी ब्रेजा कार की तलाश में हैं, जिसमें विस्फोटक होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, अंदेशा है कि डॉक्टरों ने विभिन्न डिजिटल वॉलेट्स से इस्तांबुल और दोहा से पैसे हासिल किए, जो आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए थे.

आतंक का अखिल भारतीय नेटवर्क

खुफिया सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए आतंकियों का नेटवर्क बेहद संगठित, डिजिटल रूप से सक्षम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ा था। गिरफ्तार लोग मुख्य समूह का हिस्सा थे, जिन्होंने सीधा दिल्ली सहित कई ठिकानों पर संभावित हमलों की योजना बनाई। सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत हुई, जिससे देशभर में सनसनी फैल गई.

आगे की जांच

भारतीय एजेंसियां अब तुर्की और कतर समेत विदेशी चैनलों के माध्यम से आए धन और नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही हैं। इस केस ने आतंकी समूह के देशव्यापी सक्रियता, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और डिजिटल ट्रेल्स पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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