पश्चिम बंगाल में SIR शुरू होते ही इतने लाख बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल छोड़कर भागे की खबर राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) लागू होने के बाद बांग्लादेश से आए कई हिंदू शरणार्थियों में भारी चिंता फैल गई है। इस संशोधन के कारण उन्हें अपनी नागरिकता खोने का डर सताने लगा है, जिससे कई लोगों ने आत्महत्या की कोशिश की और कई बांग्लादेशी शरणार्थी प्रदेश छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं।
राजनीतिक दल इस मुद्दे पर भिन्न-भिन्न रुख अपना रहे हैं। भाजपा के नेता शरणार्थियों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे डरें नहीं और नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि विपक्ष इस SIR प्रक्रिया और उससे उत्पन्न भय को लेकर गंभीर विरोध जता रहा है।
1 Lac Kanglus have left in 5 days
— Kreately.in (@KreatelyMedia) November 17, 2025
SIR is changing landscape
Good Morning India
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इस बीच भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 1000 से अधिक नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) शिविर लगाने का अभियान भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य शरणार्थियों को नागरिकता दिलाना है। इन शिविरों का खास तौर पर सीमावर्ती जिलों में प्रभाव देखा जा रहा है जहां जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है।
इस पूरे संदर्भ में यह साफ है कि SIR प्रक्रिया के बाद बांग्लादेशी शरणार्थियों का स्थिति अस्थिर हो गई है, और इसका राजनीतिक माहौल पर भी गहरा प्रभाव देखा जा रहा है। इससे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक संरचना में भी बदलाव की संभावना बन रही है.