बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने जबरदस्त जीत हासिल की है। रुझानों के अनुसार, भाजपा अकेले 94 सीटों पर आगे है, और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी 19, जीतन राम मांझी की पार्टी HUM 5, तथा उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटों पर आगे हैं। सभी सीटों को मिलाकर एनडीए के खाते में बहुमत के लिए आवश्यक 122 सीटें हो गई हैं, जबकि जेडीयू की 82 सीटें इस आंकड़े में शामिल नहीं हैं। यह संकेत है कि भाजपा, नीतीश कुमार के बिना भी बिहार में सरकार बना सकती है।
महागठबंधन की स्थिति कमजोर रही है, जिसमें आरजेडी कुछ सीटों पर संघर्ष कर रही है और कांग्रेस का प्रदर्शन भी काफी नीचे रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने हार की जिम्मेदारी कुछ महागठबंधन नेताओं को दी है और कहा कि सीट शेयरिंग में देरी और फ्रेंडली फाइट ने नुकसान पहुंचाया है।
2020 के चुनावों के मुकाबले इस बार भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है और एनडीए की कुल सीटें 202 के आंकड़े के करीब पहुंच गई हैं, जबकि जेडीयू की सीटें भी बढ़ी हैं। भाजपा की इस बार बिहार में जबरदस्त लहर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और चुनावी रणनीतियों से जोड़ा जा रहा है। भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम को वर्तमान में रखा है, लेकिन भाजपा में ‘अपना मुख्यमंत्री’ लाने की भी चर्चा तेज हो रही है।
संक्षेप में, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने शानदार बहुमत लिया है और भाजपा इस बार बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है और यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है.